लोकहितकारी ट्रस्ट – निर्धनों के जीवन में उम्मीद की किरण

ग्वालियर का इतिहास सामाजिक सेवा और लोक कल्याण की अनगिनत कहानियों से भरा हुआ है। इन्हीं में से एक प्रेरणादायक नाम है लोकहितकारी ट्रस्ट, जिसकी स्थापना 23 फरवरी 1994 को निर्धनों, असहायों और समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के उद्देश्य से की गई थी।

इस संस्था का मूलमंत्र है — “निर्धनों के जीवन में हर कदम पर सहयोगी”

स्थापना का उद्देश्य

जब 1934 में ग्वालियर के तत्कालीन शासकों ने बिरला ग्रुप के सहयोग से शहर के आर्थिक विकास हेतु जियाजीलॉस कॉटन मिल्स की स्थापना की थी, तब हजारों परिवारों को रोज़गार मिला। लेकिन जब वर्ष 2000 के दशक में आर्थिक घाटे के कारण ये उद्योग एक-एक कर बंद हुए, तब हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए।

इन्हीं निर्धनों की सहायता के लिए 1994 में लोकहितकारी ट्रस्ट की शुरुआत हुई — ताकि कोई भी व्यक्ति धनाभाव के कारण इलाज से वंचित न रहे।

नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएँ

लोकहितकारी ट्रस्ट का चिकित्सालय लोहमंडी, ग्वालियर फोर्ट रोड में स्थित है, जहाँ प्रतिदिन 250 से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जाता है।

एम.बी.बी.एस., एम.एस. एवं एम.डी. डॉक्टर स्वयं उपस्थित रहकर मरीजों की जांच करते हैं। सभी दवाएँ, एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच आदि पूरी तरह निःशुल्क हैं।

जनसहयोग की शक्ति

संस्था किसी सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है। ग्वालियर की धर्मप्रेमी जनता ही इसकी सबसे बड़ी पूंजी है। यहाँ ₹50 से ₹5000 प्रतिमाह तक के दानदाता सहयोग करते हैं। हजारों दानदाता हर माह अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार योगदान देकर इस सेवा यज्ञ का हिस्सा बनते हैं।

आधुनिक सुविधाएँ

संस्था में भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से एक्स-रे मशीन, एलआईसी द्वारा ब्लड एनालाइज़र, और टेस्ट बैंक ऑफ इंदौर से एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध है।

डॉ. के. एन. सचदेवा ने अपनी पत्नी स्व. श्रीमती सत्य घनश्यामदेवा की स्मृति में एक पैथोलॉजी लैब भी स्थापित कराई है जहाँ गरीब मरीजों के लिए जांचें निःशुल्क हैं।

निष्कर्ष

लोकहितकारी ट्रस्ट आज समाजसेवा का एक सशक्त उदाहरण है। यह संस्था यह साबित करती है कि जब समाज एकजुट होकर निर्धनों के लिए कार्य करता है, तो कोई भी गरीबी किसी की जान नहीं ले सकती।

यह सिर्फ एक संस्था नहीं — बल्कि मानवता की चलती फिरती मिसाल है।