ग्वालियर शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ सामाजिक सेवा के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं सेवाभावी संस्थाओं में लोकहितकारी ट्रस्ट अग्रणी है, जिसने निर्धनों की सहायता को अपना धर्म बना लिया है।
आर्थिक परिप्रेक्ष्य
जब ग्वालियर के औद्योगिक ढाँचे को 2000 के दशक में झटका लगा और हजारों लोग बेरोजगार हुए, तब शहर की सामाजिक संरचना भी प्रभावित हुई। ऐसे में लोकहितकारी ट्रस्ट ने आगे बढ़कर समाज के सबसे कमजोर वर्ग को संभाला।
चिकित्सा सेवा में अग्रणी
संस्था हर दिन सैकड़ों गरीब मरीजों को निःशुल्क इलाज प्रदान करती है। यहाँ डॉक्टर न केवल सेवा करते हैं, बल्कि मानवीय दायित्व का उदाहरण भी पेश करते हैं।
संस्था का यह संकल्प है कि “किसी भी निर्धन को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा।”
सहयोग का मंत्र
संस्था पूरी तरह जनसहयोग पर आधारित है। शहर के हजारों दानदाता हर माह स्वेच्छा से सहयोग करते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है — संग्रहक श्री हेमेन्द्र मिश्र दानदाताओं से धन प्राप्त कर रसीद प्रदान करते हैं।
आधुनिक साधन और भविष्य की योजनाएँ
संस्था ने विभिन्न बैंकों और संगठनों के सहयोग से अत्याधुनिक सुविधाएँ जुटाई हैं —
- एक्स-रे मशीन
- ब्लड एनालाइज़र
- एम्बुलेंस सेवा
अब संस्था एक नए अस्पताल का निर्माण करना चाहती है, जहाँ गंभीर मरीजों को भर्ती करने और विशेषज्ञ सेवाएँ देने की व्यवस्था हो।
निष्कर्ष
लोकहितकारी ट्रस्ट आज एक ऐसा उदाहरण है जो दिखाता है कि जब समाज एकजुट होकर काम करता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
यह संस्था सिर्फ इलाज नहीं देती — यह आशा, सम्मान और मानवता का संचार करती है।